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उच्च न्यायालय ने निरस्त की पी.जी. काउंसलिंग की मेरिट सूची राज्य शासन को पुनरीक्षण कर पुनः जारी करने के दिए निर्देश

भोपाल जबलपुर आज मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की माननीय मुख्य न्यायाधिपति श्री आर. वी. मालीमथ एवं न्यायमूर्ति श्री विशाल मिश्रा की युगल पीठ ने राज्य शासन द्वारा हाल ही में स्नातकोत्तर पी. जी. मेडिकल कोर्स में प्रवेश हेतु बनाई गई वरीयता सूची को निरस्त कर, उसको पुनरीक्षण कर फिर से जारी करने के निर्देश दिए हैं| उच्च न्यायालय के इस आदेश से अब जो काउंसलिंग प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी, उस पर एक तरह से विराम लग गया है, जब तक राज्य शासन पुनः उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार वरीयता सूची नहीं जारी करता| यह विस्तृत अंतिम आदेश उन याचिकाओं में आए, जो कि प्रदेश के लगभग 30 इन सर्विस डॉक्टरों द्वारा दायर की गई थी, जिसमे जिला क्षेत्रों में काम करने वाले मेडिकल ऑफिसर, डेमोंस्ट्रेटर एवं ट्यूटर को राज्य शासन द्वारा वरीयता सूची से अलग कर दिया गया था एवं उन्हें 30% आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा था| इसके विरुद्ध डॉक्टरों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई, जिसमें मूल मुद्दा यह उठा की राज्य शासन द्वारा जिन संशोधित नियमों के आधार पर डॉक्टरों को उपरोक्त लाभ से वंचित किया जा रहा था, वे नियम पूर्व में परिक्षा में मेरिट में स्थान पा चुके डॉक्टरों पर प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद लागू होंगे कि नहीं याचिकाकर्ता डॉक्टरों की ओर से अधिवक्ता श्री सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता एवं अधिवक्ता आदित्य सांघी द्वारा पैरवी की गयी एवं राज्य शासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. सी. गिल्ड़ियाल एवं जाहनवी पंडित द्वारा पैरवी की गई ज्ञात है कि, सितंबर 2022 के दूसरे सप्ताह से म. प्र. राज्य शासन द्वारा स्नातकोत्तर पी. जी. मेडिकल एडमिशन में काउंसलिंग की प्रक्रिया प्रारंभ की गई, जिसमें पूर्व में जारी मेरिट लिस्ट को आधार बनाया जा रहा था| इस मेरिट लिस्ट में प्रदेश भर के 50 से ज्यादा उन सभी इन सर्विस डॉक्टरों को वरीयता सूची से बाहर कर दिया गया, जिन्होंने जिला क्षेत्रों में मेडिकल ऑफिसर, डेमोंस्ट्रेटर अथवा ट्यूटर के नाते अपनी सेवाएं प्रदान की थी| उनको निष्कासित करने का आधार, राज्य शासन द्वारा हाल ही में मेडिकल प्रवेश नियम, 2018 में लाए गए संशोधन, को बनाया गया, जिसके द्वारा जिले के सभी डॉक्टरों को 30% आरक्षण के लाभ के लिए अनुपयुक्त माना गया| वरीयता सूची से निष्कासित डॉक्टरों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर करते हुए यह आधार लिया गया कि जब 26 जुलाई 2022 को प्रवेश नियमों में संशोधन किया गया, उस दिनांक को असंशोधित नियमों के अनुरूप वे 30% आरक्षण के पात्र थे एवं नीट परीक्षा दे कर उसमें उत्तीर्ण हो चुके थे| याचिका में यह भी आधार लिया गया कि इस सत्र 2022-23 की प्रवेश प्रक्रिया नीट की परीक्षा के साथ ही प्रारंभ हो चुकी थी, एवं उसके परिणाम आने के पश्चात राज्य शासन द्वारा अनुचित तरीके से, मध्य में, नियमों को परिवर्तित एवं संशोधित करते हुए 50 से अधिक डॉक्टरों को आरक्षण के लाभ हेतु अपात्र कर दिया| डॉक्टरों की ओर से अधिवक्ता श्री गुप्ता द्वारा तर्क दिया गया कि, सु. को. द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों में स्पष्ट है कि प्रवेश प्रक्रिया एक बार प्रारंभ होने के पश्चात उस पर लागू होने वाले नियमों का मध्य में संशोधन नहीं किया जा सकता अथवा उसको लागू नहीं किया जा सकता गुप्ता द्वारा यह भी कहा गया कि, जब संशोधन के पूर्व सभी डॉक्टर जो जिला क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं पात्र थे, जिस संशोधन के द्वारा उन्हें अपात्र किया गया, वह संशोधन अगले वर्ष से ही लागू होगा, ना कि इस वर्ष से गुप्ता एवं अन्य अधिवक्ताओं के तर्कों पर गौर करने के पश्चात उच्च न्यायालय की युगल पीठ ने अपने विस्तृत अंतिम आदेश के द्वारा निर्देशित किया कि प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने के पश्चात अर्हता संबंधित नियमों को मध्य में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है, जिसके द्वारा पूर्व में अर्हता रखने वाले डॉक्टर अचानक ही संशोधन के चलते द्वारा अपात्र हो जाएँ| उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जब नीट परीक्षा के दिनांक डॉक्टर 30% आरक्षण हेतु पात्र थे तो फिर काउंसलिंग के पूर्व उनको इस प्रकार से अपात्र नहीं किया जा सकता| उच्च न्यायालय द्वारा अंततः राज्य शासन द्वारा जारी संपूर्ण वरीयता सूची को निरस्त करते हुए आदेशित किया कि उच्च न्यायालय के आदेश के तारतम्य में वह पुनः तैयार की जाए एवं उसी के आधार पर नई काउंसलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए सु. को. जाएगा राज्य शासन उच्च न्यायालय द्वारा राज्य शासन की संपूर्ण वरीयता सूची को निरस्त करने के पश्चात राज्य शासन महाधिवक्ता कार्यालाय से सुप्रीम कोर्ट में अपीलीय याचिका लगाने का अभिमत प्राप्त कर रहा है,  जिसके पश्चात इस प्रकरण को सुप्रीम कोर्ट ले जाया जा सकता है, क्योंकि उच्च न्यायालय के फैसले के प्रभाव से काउंसलिंग प्रक्रिया लगभग हफ्ते से दस दिन तक टल गई है|

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