अगर आप इंदौर। द्वारकापुरी थाना क्षेत्र में किसी खबर को लेकर कवरेज करने जा रहे हैं,या फिर किसी खबर को लेकर कवरेज करने का सोच रहे है,या फिर किसी खबर को प्रकाशित कर चुके हैं,फिर चाहे वो सबूतों के साथ ही क्यों ना हो अगर वो खबर थाने की नवीन महिला टीआई अलका मेनिया की आंखों में खटकने लगी हैं...तो फिर तो ये आपके लिए खतरे की घंटी हो सकती हैं। खासकर तब -जब आप द्वारकापुरी थाना क्षेत्र में रहते हैं तो आपके लिए सर्तक होना और भी जरूरी हो जाता हैं। क्योंकि आपको भी खबर छापे जाने के बाद थाने की हवा खाना पड़ सकती हैं। फिर चाहे वो कुछ क्षण की हो या घंटों की आपको जबरन किसी ना किसी कारण से थाने की हवा जरूर खाना पड़ सकती हैं...और इसके लिए कुछ खास नहीं सिर्फ एक आवेदन के आधार या आप कह सकते हैं कि आवेदक को आधार बनाकर के आपको बूलाकर या फिर थाना परिसर में देखकर ही थाने में बैठाया जा सकता हैं। और अगर मामला पुलिस के आला अधिकारियों तक पहुंच भी गया तो पूछताछ व अन्य बात का कहकर मामले को लेकर पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों को गुमराह तक भी किया जा सकता हैं। जो इस थाना क्षेत्र में तो आम बात हैं ऐसा में यू ही नहीं कह रहा में खूद इसका भूगत भोगी हूं। जो हाल ही में पाच दिन पूर्व 09/12/2022 को थाने के भ्रष्टाचार की एक खबर को लिखे जाने के बाद इस तरह के दुर्व्यवहार का शिकार हो चुका हूं। आपको बता दू कि पाच दिन पूर्व ही द्वारकापुरी टीआई अलका मेनिया ने मूझे थाना परिसर में देखकर एक पुलिसकर्मी के जरिए अपने केबिन में बुलाया और फिर जैसे ही में केबिन के अंदर गया तो मैंडम ने देखकर कहां कि चश्मा उतार हिरों मत बन यह सूनकर मैने अपना चश्मा भी उतार कर अपनी शर्ट की जैब में रख लिया उसके बाद मैंडम बोली कि तूने थाने की खबर कैसे छापी और मेरा फोटो कैसे लगाया मेरा वर्जन क्यो नहीं लिया यह सूनकर जैसे ही मैंने कहां कि मैंडम मेरी बी.बी.एस परिहार साहब से बात हो गई थी। तो मैंडम बोली गांडू मेरा फोटो कैसे छापा फिर क्या था यह सुनकर के में तो कुछ देर के लिए हक्का -बक्का रह गया कि आखिर मैडम एक महिला होते हुए इस तरह से कैसे बात कर सकती हैंं...इससे पहले की मैं कुछ और बोलता मैंडम ने और भी कई तरह के अशब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया। जिसको में यहां शब्दों में बयां नहीं कर सकता यह देखकर में बोलता भी क्या तो मेने चुप रहना ही उचित समझा पर कब-तक बीच -बीच में जब भी मौका मिलता में जरूर मैेंडम के लगाए आरोपों का जवाब देता गया। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी थाने में जो की अच्छे से जानते थे कहते रहे सोनू भाई आप थोडा चुप रहो में तब भी ये कहता रहा कि ये गलत हो रहा हैं लेकिन किसी ने मेरी एक ना सुनी और सभी मैंडम के पक्ष में बोलते रहे तभी मैेंडम ने आदेश दे डाला कि बैठाओं साले को थाने में मेने कहां कि किस लिए तो कहां की तूने खबर कैसे छापी अब - कभी थाने की खबर छापेगा मेने कहां मैंडम मेने कुछ गलत नहीं लिखा तो मैंडम ने कहां कि तू तो सही बोलता हैं बाकि सब गलत हैं। मेने कहां मैेडम आप गलत कर रहे है...तो कहां मेरा फोटो कैसे छापा बार -बार मैडम एक ही बात कहती रही मुझे अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया। इस दौरान एक ऐसा वाक्या भी हुआ जब मैंडम ने मुझे अपने केबिन में चिल्लाना शुरू किया यह देख दूसरे पुलिसकर्मी भी मैंडम की अवाज सुनकर केबिन में आ गए तभी एक पुलिसकर्मी पीछे से आया और बोला की मैंडम ये पहले भी अपने थाने की खबर छाप चुका हैं। इसने मेरा भी नाम छापा था। इतना सुुनकर मैंडम का पारा तो और गर्म हो गया और फिर ये देख कुछ और पुलिसकर्मी भी इसी तरह मैंडम से कहने लगे हमारा भी हमारा भी छापा था। ये दृश्य देख ऐसा लग रहा था मानों शिकायतों की एक झड़ी सी लग गई हैं। दूसरी और मन में एक ख्याल यह भी आया कि ऐसे कितनी खबरें मैंने थाने में हो रहे गलत कार्यों के विरुद्ध लगा दी है,जो मुझे ही याद नहीं था इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी दबी जुबान में ये भी कहते रहे सोनू भाई थाने की खबर मत छापा करों आपसे पहले भी कहां था तो मेने कहां कि थाने की कोई बहुत बड़ी खबर तो नहीं छाप दी थी तो थाने में मौजूद पुलिसकर्मी ने कहां अब आपको भी क्या बोलू और टीआई मैंडम को कुछ बोल नहीं सकते आप जूते उतारकर खड़े हो जाओं मेंने कहां क्यों? तो कहां आप तो खड़े हो जाओं तभी मेने कहां कि में बाहर जूते उतार देता हूं तो कहां नहीं मैंडम ने आपके बाहर जाने का मना किया हैं। तो मेने कहां जूते तो मत उतरवाओं में कोई अपराधी तो नहीं हूं तो कहां कि जूते उतारों इस दौरान मेने दबाव के कारण जूते भी उतार दिए फिर पुलिकर्मी ने मेरी जेब कि तलाशी ली और कहां कि कैमरा तो नहीं लगा के आए हो मेने कहां कि भाई आपको कैमरा कहां दिख रहा हैं। इसके बाद मैंडम ने मुझे जहां अपराधियों को बैठाया जाता हैं...वहां पर बैठा दिया तभी कुछ देर बाद मैंडम वहां भी आ गई और कहां कि तू पैसों की मांग करता हैं,तो मेने कहां कि मेने कभी पैसे नहीं मागे तो कहां कि तू तो अकेला सही बोलता हैं...बाकि सब गलत हैं,तो मेने कहां अगर मेरे खिलाफ आपके पास सबूत हो तो आप मुझपर मुकदमा दर्ज कर दो तो मैडम ने कहां कि तेरे खिलाफ आवेदन आया हैं...और एक आवेदन पहले का हैं। इस दौरान यह भी कहां कि इसके खिलाफ और आवेदन बुलाओं और इसपर अपराध दर्ज करों। अचानक हुए इस पूरे वाक्ये का वीडियों तो में नहीं बना सका लेकिन हां थाने में लगे कैमरे में जरूर पूरा वाक्या कैद हो गया पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को इसपर संज्ञान लेना चाहिए ताकि मामले का दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और मामले की सत्यता हर किसी को पता लगे और ऐसी कार्रवाई हो कि एक मिसाल बने खैर जो भी हो आखिर थाने में नवीन महिला टीआई वर्दी का किस तरह अपने हिसाब से इस्तेमाल कर रही हैं वर्दी की आड़ में चौथे स्तंभ को ही बत्ती एक और तो प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान जी पत्रकारों की खबरों पर तुरंत विभागों को अपनी बत्ती जलाने की बात कहते हैं इसके साथ ही अगर विभाग कार्रवाई नहीं करेंगा तो मैं करूंगा यह कहते हुए नजर आते हैं दूसरी और उन्हीं के अधीनस्थ पुलिस विभाग मैं सबूतों के साथ खबरों के प्रकाशन पर उनके अपने सपनों के शहर इन्दौर में इस तरह पुलिस कि वर्दी का गलत इस्तेमाल कर अलका मेनिया जैसे पुलिस अफसर उनके बयानों को ही बत्ती दे देते हैं...और तथ्यों के साथ खबरें प्रकाशित करने पर भी खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को ही आरोपियों की तरह थाने में बैठा देते हैं फिर चाहे उनके ऊपर कोई अपराध हो या ना हो फिर भी वर्दी की आड़ में इस तरह का काम करने से भी परहेज नहीं करते ऐसे में आखिर कैसे विभाग की बत्ती जलाने के लिए पत्रकार अपनी निष्पक्षता को बरकरार रखेगा यह एक बड़ा सवाल है!


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