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दिपावली से पहले दिए में तेल देखने पहुंचा खाद्य अमला ,राजस्व अमला भी कार्यवाही में शामिल


 शामगढ़ : दिपावली के अवसर पर खाद्य पदार्थो में मिलावट की जांच के मद्देनजर आज शनिवार को खाद्य विभाग  मंदसौर की टीम शामगढ़ पहुंची। खाद्य व राजस्व की संयुक्त टीम ने गरोठ रोड़ स्थित प्रजापति रेस्टोरेंट , पोरवाल नमकीन व स्टेशन रोड़ स्थित बीकानेर मिष्ठान्न के साथ ही टकरावद रोड़ वार्ड 3 में नमकीन निर्माता नंदु लोहार व मेनरोड़ स्थित राजु मुजावदीया की दुकान गोवर्धन कचोरी सेंटर आदी संस्थान पर पहुंचकर सैम्पलिंग की कार्यवाही की । खाद्य अधिकारी एस जामोट के साथ तहसीलदार आर एल मुनिया व पटवारी नितिन कटलाना भी शुद्ध के लिये युद्ध में कार्यवाही के दौरान मौजुद रहे  विदीत हो की केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2020 को दुकानों पर बेची जानी वाली खुली मिठाइयों की ट्रे पर मिठाई का नाम, उसे बनाने और एक्सपायरी डेट लिखने के आदेश जारी किए थे लेकिन आदेश जारी हुए लेकिन हवा भी हो गए। यानी अगर मिठाइयां नमकीन बांसी भी बिक रही हैं तो पता नहीं चल रहा है। विभाग सैंपलिंग की कार्रवाई तो कर रहा है लेकिन सरकारी आदेश की पालना को लेकर सख्त नहीं है। इसी का फायदा दुकानदार उठा रहे हैं। हालांकि विभाग ने अभी सभी दुकानों की खाक नहीं छानी है। इक्का-दुक्का दुकानों से ही सैंपल कलेक्ट किए हैं। अधिकारियों की माने तो खुली मिठाइयों के सामने मिठाई की निर्माण तारीख और बेस्ट बिफोर यूज की डेट लिखना जरूरी है। जो नहीं लिख रहे हैं उन पर कार्रवाई की जाएगी बता दें की अब तक सिर्फ पैकिंग मिठाई व सामानों पर ही एक्सपायरी डेट लिखी होती थी। जिसे देखकर उपभोक्ता सामान खरीदते थे लेकिन खुली मिठाइयां दिखने में सुंदर होती थीं और पता भी नहीं चलता कि इसे बनाएं कितना समय हो गया या कितनी पुरानी है। ऐसे में उपभोक्ता मिठाई खरीद लेते थे और दुकानदार भी नुकसानी से बचने के लिए उन्हें बेच देते थे लेकिन केंद्र सरकार ने सख्ती बरतते हुए खुली मिठाइयों की ट्रे पर उनके निर्माण और एक्सपायरी डेट लिखे जाने के आदेश जारी किए थे। शामगढ़ में छोटी-बड़ी मिलाकर मिठाई-नमकीन की 30 दुकानें हैं। दुकानों का जायजा लिया तो ज्यादातर दुकानों पर न मैन्युफेक्चरिंग डेट लिखी है और ना बेस्ट बिफोर यूज की डेट। दुकानदार धड़ल्ले से मिठाई बेचे जा रहे हैं। ऐसे में सरकार के आदेश की जमीनी हकीकत वास्तविकता से बिलकुल उलट नजर आ रही है  शामगढ़ में खाद्य पदार्थों की जांच की जिम्मेदारी जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की है। रूटीन कार्रवाई नहीं होने से दुकानदारों के हौसले बढ़ते हैं। उन्हें पता है खाद्य सुरक्षा विभाग त्योहार के दो से पांच दिन पहले ही कार्रवाई करेंगे, इससे पहले ही वे पुराना माल ठिकाने लगा देते हैं या छिपा लेते हैं क्योंकि एक बार जांच होने के बाद कोई पलट कर नहीं आता दरअसल शामगढ़ में दुकानदार धड़ल्ले से मिठाई बेचे जा रहे हैं। ऐसे में सरकार के आदेश की जमीनी हकीकत वास्तविकता से बिलकुल उलट नजर आ रही है। त्योहारी सीजन में मावे की मिठाई अधिक बिकती है और भाव भी ज्यादा होते हैं। दुकानों पर मावा बनाने वाले कम होते हैं। ज्यादातर लोग चौमेहला ,भवानीमण्डी से ही मावा मंगाते हैं। जो तय दुकानदारों को बेचा जाता है। नगर में कुछ होटल संचालक ही दूध की खरीदी कर मावा तैयार करते हैं। यही कारण है कि ज्यादातर दुकानदार मावे की मिठाई को पहले बनाकर रख लेते हैं। चूंकि फ्रीजर में पता नहीं चलता कि वो अच्छी है या एक्सपायर हो चुकी है। दुकानदार त्यौहारी भीड़ में ताजी मिठाइयों के साथ पुरानी मिठाइयां भी बेच देते हैं जिसका असर लोगों की सेहत पर पड़ता है।

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