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घृतराष्ट्र बन चुके नीमच जिला प्रशासन की अनदेखी के चलते पूरे अंचल में जम के चल रहा है तेल के पीछे का खेल


पिछले डेढ़ सालों से दो मर्तबा कोरोना महामारी का दंश झेल कर टूट चुके हर आमजन और गैर नोकरी पेशा परिवारों का दर्द फिर ऊपर से इस महंगाई डायन का दोहरा दंश झेलना भी इस तरह के परिवारों लिए एक मजबूरी सा बनता जा रहा है ।फिर यदि ऊपर से हर एक की थाली का एक अहम हिस्सा "खाद्य तेल " भी संभवतः मिलावटी होने के साथ साथ इनके पैक पर दर्शाई गई मात्रा से कम कम मिल रहा हो तो कोई कौतूहल वाली बात नही होगी इस त्योहारी सीज़न में इस "तेल के पीछे का खेल पर की गई मेरी इस पड़ताल में नीमच अंचल व लगते हुए राजस्थान के किराना बाज़ार में बेचे जा रहे लगभग सभी लोकल ब्राण्ड  जैसे MP44,गर्ग, सोयम, मधुर,कोहिनूर इत्यादि जैसे अनेको लोकल ब्राण्ड सोयाबीन तेल के पाऊचों में दर्शायी गयी मात्रा में 5 ग्राम से लेकर 25 ग्राम और बड़े पैकिंग में 100 से 500 ग्राम तक की कमी पाई गई है ,नीमच के लोकल ब्राण्ड गर्ग और सोयम सोयाबीन तेल कारोबारियों द्वारा तो अपने पैक पर तेल की मात्रा मिली लीटर में न दर्शाते हुए ग्राम में दर्शायी जा रहा है और  गर्ग लाइट सोयाबीन तेल के पाउच को हूबहू 1लीटर/910 ग्राम जैसा बनाया हुआ है और मात्रा भी कम है, जिसे ₹140/-से ₹180/-प्रति पाउच के मान से बेचकर धोखाधड़ी की जा  रही है ये छोटी  मात्रा पढ़ने में काफी नगण्य लग रही होगी लेकिन इनके बल्क में हो रहे उत्पादन और बिक्री के मान से इतनी कम मात्रा के बावजूद नीमच के तेल कारोबारियों द्वारा हर दिन लाखों रुपयों के वारे न्यारे किये जा रहे हैं ये तो कम मात्रा वाली बात हुई, पर इनमे इनमे मिलावट न हों इसकी कोई गारन्टी इसलिए भी नही है प्रकार के अधिकांश तेल कारोबारियों द्वारा केन्द्र सरकार द्वारा पैकेट बन्द खाद्य सामग्री की शुद्धता के लिए स्थापित किये गए *भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण  fssai द्वारा तय किये गए मानकों और नियमों के विपरीत सम्मिश्रण Blanding तथा अपमिश्रण Adualtration को अपनाते  हुए सरेआम मानव जीवन के साथ खिलवाड़ करते हुए आमजन की जेब कटाई की जारही  है भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण  fssai के नियमानुसार पैक की जाने वाली प्रत्येक खाद्य सामग्री  को इनकी लेब से हरी झंडी मिलने के बाद ही पैक कर बाजार में बेचा  जा सकता है परंतु ये बेईमान मिलावटखोर येन केन प्रकारेण fssai का जिले स्तर पर  ₹100/-,राज्य स्तर पर ₹3000/- तथा राष्ट्रीय स्तर  पर बिक्री के लिए ₹5000/- वाला fssai रजिस्ट्रेशन नम्बर one time ख़रीदकर(?) अंकित तो ज़रूर कर रहे हैं पर क्या ये खाद्य तेल रजिस्ट्रेशन के समय संबंधित प्रयोगशाला द्वारा पास किये गए नमूने और अंकित न्यूट्रिशनल वेल्यू के लिहाज़ से शुद्ध होता होगा जिला प्रशासन के तहत इस प्रकार की मिलावट खोरी तथा कम नाप तौल जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा तथा नापतौल जैसे दो अहम महकमें हैं, फिर भी ना जाने क्यों या किस मजबूरी के चलते ऊपरोक्त दोनो महकमें आम जन की कट रही जेब और उनकी सेहत के साथ हो रहे खिलवाड़ को नही रोक पा रहे हैं इसमे इस जिले के शुद्ध के लिए युद्ध लड़ने वाले खाद्य सुरक्षा एवं ओषधि विभाग की भूमिका भी काफी कुछ  संदिग्धों की श्रेणी में नज़र आती है इसका खुलासा तो अगर लिफाफा संस्कृति को परे रखते हुए,नए सिरे से लिये जाने वाले इन मिलावटी खाद्य तेलों के नमूनो तथा अंकित मात्रा/वज़न की गहनता से जाँच कर मिलने वाले नतीजो के बाद  ही सामने आ सकेगा और सरकार द्वारा चलाये जा रहे शुद्ध के लिए युद्ध अभियान की सार्थकता सिद्ध हो सकेगी 
 गीता शर्मा "प्रणय संपर्क 70001 96140
नीमच

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