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NEET एग्जाम रद्द करने की मांग, अजमेर-कोटा में प्रदर्शन:NSUI कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की, लाठियों से खदेड़ा; ABVP ने किया हंगामा

राजस्थान NEET एग्जाम को रद्द करने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे है। प्रदेश में आज कोटा और अजमेर में ABVP और NSUI ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हो गई। पुलिस ने लाठियां भांजकर कार्यकर्ताओं को खदेड़ा NEET परीक्षा रिजल्ट के बाद से विवादों में है। देश भर से स्टूडेंट्‌स ने पेपर लीक सहित ग्रेस मार्क्स पर सवाल उठाकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी पेश की। कोर्ट के नोटिस के बाद NTA ने ग्रेस मार्क्स पाने वाले बच्चों की परीक्षा वापस करवाने का फैसला लिया है। ये परीक्षा 23 जून को होगी लेकिन स्टूडेंट्‌स एग्जाम रद्द करने की मांग पर अड़े हैं कोटा में पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट प्रदर्शन करने जाते NSUI के कार्यकर्ता कोटा में पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट प्रदर्शन करने जाते NSUI के कार्यकर्ता बेरिकेड पर चढ़कर किया हंगामा कोटा में आज एनएसयूआई ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। सर्किट हाउस के बाहर करीब 300 कार्यकर्ता एकत्रित हुए। इसके बाद एनएसयूआई प्रदेशाध्यक्ष विनोद झाकड़, प्रदेश प्रभारी अखिलेश यादव, जिलाध्यक्ष विशाल मेवाडा के नेतृत्व में कार्यकर्ता पैदल मार्च करते और नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट की तरफ रवाना हुए पुलिस ने कलेक्ट्रेट के बाहर बेरिकेड लगा रखे थे पुलिसकर्मियों ने कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोका। इस पर कुछ कार्यकर्ता बेरिकेड पर चढ़ गए और अंदर जाने की मांग करने लगे। इस बीच पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठियां भांजी और छात्रों को वहां से खदेड़ दिया NSUI के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के अंदर घुसने की कोशिश की तो पुलिस ने खदेड़ा NSUI के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के अंदर घुसने की कोशिश की तो पुलिस ने खदेड़ा पेपर रद्द करने की मांग प्रदेशाध्यक्ष विनोद झाकड ने कहा कि कोटा कोचिंग नगरी के नाम से मशहूर था। अब सुसाइड सिटी के नाम से हो रहा है। लाखों बच्चे डॉक्टर बनने के सपने लेकर आते है लेकिन जब इस तरह से पेपर में रिजल्ट में गडबडी होती है। पेपर लीक होते हैं तो बच्चे टूट जाते है। नीट का पेपर लीक हुआ है। तीस तीस लाख रूपए में पेपर आऊट किए है। इसके बाद भी अगर केन्द्र सरकार नहीं मानती तो लाखों स्टूडेंटस के साथ अन्याय हो रहा है। सरकार के झूठे तर्क नहीं चलेंगे। पेपर लीक हुआ है और नीट को रदद कर फिर से करवाया जाना चाहिए शांतिपूर्ण तरीके से कर रहे थे प्रदर्शनजिलाध्यक्ष विशाल मेवाडा ने कहा कि स्टूडेंटस शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने पहुंचे थे। हमारी मांग थी कि कलेक्टर से मिलकर ज्ञापन देंगे। पुलिस ने जाने से रोका। कुछ कार्यकर्ताओं ने कोशिश की तो उन पर लाठियां भांजी गई। स्टूडेंटस की आवाज को दबाने की कोशिश सरकार कर रही है। एनएसयूआई ने पिछले दिनों भी हस्ताक्षर अभियान चलाया था एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष विनोद झाकड और जिलाध्यक्ष विशाल मेवाडा स्टूडेंट्‌स को संबोधित करते हुए एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष विनोद झाकड और जिलाध्यक्ष विशाल मेवाडा स्टूडेंट्‌स को संबोधित करते हुए अजमेर में ABVP का प्रदर्शन अजमेर में नीट यूजी 2024 एग्जाम को रद्द करने और सीबीआई जांच करवाने की मांग को लेकर ABVP के नेतृत्व में स्टूडेंट्स रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पर पहुंचे। स्टूडेंट्स ने छात्र नेताओं के नेतृत्व में प्रदर्शन किया।छात्रनेता आसुराम डूकिया ने बताया- परीक्षा के आधे घंटे पहले ही पेपर मार्केट में आ गया। बिहार में पूरा ग्रुप पकड़ा गया, जिसने 60 करोड़ में खरीदा। इसके बाद भी पेपर को लीक माने बिना 24 लाख बच्चों से खिलवाड़ करते हुए रिजल्ट जारी कर दिया गया है दूसरी और सुप्रीम कोर्ट में नीट की काउंसलिंग को निर्धारित जारी रखने की आदेश दिया। साथ ही जिन 1563 स्टूडेंट्स को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे उनकी परीक्षा पुनः लेने का आदेश दिया। डूकिया ने कहा कि पूरे देश में विद्यार्थियों और अभिभावकों ने इस परिणाम को लेकर तो काफी असंतोष है, साथ सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय से भी निराश है केवल 1563 विद्यार्थियों की ही परीक्षा क्यों ली जा रही है, वर्तमान में घोषित रिजल्ट में रैंक में इतनी बढ़ोतरी 1567 विद्यार्थी द्वारा संभव नहीं है। यह अन्य स्टूडेंट के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इसे लेकर जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया है और रिजल्ट की सीबीआई जांच करवाने और एग्जाम को रद्द कर वापस आयोजित करवाने की मांग की गई हैअजमेर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते ABVP के कार्यकर्ता अजमेर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते ABVP के कार्यकर्ता पुलिस प्रशासन पर दबाव का आरोप छात्रनेता उदय सिंह शेखावत ने कहा कि वह सभी स्टूडेंट के साथ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करने के लिए पहुंचे थे। लेकिन पुलिस प्रशासन के द्वारा उन पर दबाव बनाया गया। बच्चों को वापस भेजने की कोशिश की गई। एक तरफ बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है तो दूसरी तरफ उसको अपने न्याय के लिए आवाज उठाने के लिए भी रोका जा रहा है। वह इसकी निंदा करते हैं।

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