सिंगोली:- फिलहाल किसान खरीफ की फसलों के निपटारे में लगे हैं लेकिन निकटवर्ती नीम का खेड़ा गांव के लोग नए संकट का सामना कर रहे हैं। खेती-बाड़ी के सीजन में चंबल पेयजल परियोजना के ठेकेदार द्वारा जबरदस्ती गांव की सड़कों को उधेड़ दिया गया। इसके चलते गांव के गली मोहल्ले में लोगों का आना जाना भी दूभर हो गया। किसान खेतों से अपनी फसल और मवेशियों को घर पर नहीं ला पा रहे। फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों पर ही सोने को मजबूर है। पुरानी पाइपलाइन को उखाड़ने से लोगों के समक्ष पेयजल संकट गहरा गया। हालांकि ग्रामीणों ने ठेकेदार से खेती-बाड़ी के सीजन में काम बंद करने का आग्रह किया था लेकिन ठेकेदार ने एक नहीं सुनी और जबरदस्ती हर गली मोहल्ले में डिस्ट्रीब्यूशन लाइन के लिए सीसी सड़कों को खोद दिया गया। मजेदार बात यह है कि चंबल पेयजल परियोजना का अभी बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक तैयार नहीं हुआ लेकिन ठेकेदार द्वारा गांव में डिस्ट्रीब्यूशन लाइन का काम शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों को चिंता इस बात की है कि परियोजना का पानी तो न जाने कब आएगा लेकिन इस परियोजना ने उनकी पुरानी पेयजल व्यवस्था को भी छिन्न भिन्न कर दिया। ऐसे में गर्मी के दिनों में पेयजल का संकट गहरा सकता है। रतनगढ़ से करीब 5 किलोमीटर दूर जावदा रोड पर स्थित 1000 लोगों की आबादी वाले इस गांव के लोग पिछले एक महीने से ठेकेदार की मनमानी के चलते विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने ठेकेदार के समक्ष खेती बाड़ी के सीजन के बाद काम शुरू करने का आग्रह किया था लेकिन ठेकेदार ने उनकी एक नहीं सुनी और अपने काम में टूट गया। पूरे गांव की सीसी सड़क को बीचोबीच से करीब तीन-तीन फीट गहरी खुदवा दिया गया। ताबड़तोड़ खुदाई से गांव की पुरानी पेयजल पाइपलाइन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। हालत यह है कि गांव के अपने ही मोहल्ले में एक दूसरे के घर तक नहीं आ जा पा रहे हैं जबकि खरीफ की फसलों की थ्रेसिंग हो चुकी है। मुसीबत यह है कि फसल निकालने के बाद भी किसान अपने खेतों से फसल घर नहीं ला पा रहे क्योंकि ट्रैक्टर और बैल गाड़ी तो दूर की बात गांव की गली मोहल्ले में पैदल चलना भी दुष्कर है खेत पर सोने को विवश गांव के लोगों का कहना था कि फसलों को घर तक लाने ले जाने के लिए ट्रैक्टर इत्यादि का इस्तेमाल होता है परंतु गांव के गली मोहल्लों के बीचों बीच इतनी गहरी खाई खोद दी गई कि वाहनों को लाना असंभव है। ऐसे में फसलों को खेत पर ही रखना पड़ रहा है और उन्हें उसकी सुरक्षा के लिए रात खेतों पर ही गुजारनी पड़ रही है। फसले निकल कर तैयार हो चुकी है, ऐसे में चोर उचक्के भी खेतों पर पहुंचने लग गए। कई मवेशी भी खाई में गिर गए इस कारण अपने पशुओं को खेत पर ही रखना पड़ रहा है। दूध दुहने भी लोगों को खेत पर जाना पड़ रहा है खेती बाड़ी छोड़ पुरानी लाइन को जोड़ने में जुटे लोग गुड्डू धाकड़ का कहना था बरसों से गांव के लोगों के सहयोग से चल रही नल जल योजना की पाइपलाइन को भी उखाड़ दिया गया। खेती-बाड़ी के सीजन में लोगों को समय नहीं है लेकिन अपने पाइप फिर से जोड़ने का काम करना पड़ रहा है। ठेकेदार तो मिट्टी भर कर चला जाएगा, उसके बाद उन्हें ही फिर से सड़क की खुदाई करनी पड़ेगी। इस कारण कई लोग खेती-बाड़ी के काम को छोड़कर इस काम को करने में जुटे हैं। पता नहीं चंबल पेयजल योजना का पानी तो कब आएगा लेकिन इस योजना ने हमारे सामने नया संकट उत्पन्न कर दिया ठेकेदार के समक्ष लगाई गुहार गेंदमल धाकड़ के अनुसार जैसे ही ठेकेदार ने काम शुरू किया हमने उनके सामने खेती बाड़ी का सीजन होने की दुहाई दी लेकिन उसने हमारी एक नहीं मानी और जेसीबी चला दी। हालत यह है कि अब हम लोग मोहल्ले में भी एक दूसरे के घर तक नहीं आ जा सकते फिर वाहनों से घर पर फसल कैसे ला सकते हैं। कई मवेशी भी चोटिल हो गए, ऐसे में उन्हें भी खेत पर ही रखने को मजबूर है।न टंकी और न ही फिल्टर प्लांट, डिस्ट्रीब्यूशन लाइन का क्या औचित्य बालकिशन धाकड़ का सवाल था कि जब चंबल परियोजना का कोई इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार ही नहीं हुआ फिर इतने समय पहले गांव में डिस्ट्रीब्यूशन लाइन बिछाने का क्या औचित्य है। नियमानुसार पहले टंकी, फील्डर प्लांट और मुख्य पाइपलाइन बिछाई जाती है। टेस्टिंग के बाद गांव में डिस्ट्रीब्यूशन लाइन बिछाने का प्रावधान है परंतु यहां ठेकेदार द्वारा न जाने क्यों डिस्ट्रीब्यूशन लाइन बिछाई जा रही है। ठेकेदार की मनमानी का उन्हें खमियाजा भुगतना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता समंदर पटेल गत दिनों अपने दौरे के दौरान इस गांव में पहुंचे जहां लोगों ने अपनी इस समस्या को उनके सामने रखा। पटेल ने उनकी समस्या को वाजिब बताते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने से पहले गांव में डिस्ट्रीब्यूशन लाइन बिछाने को अनुचित बताया और आरोप लगाया कि जिन-जिन गांवों से स्थानीय विधायक मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा को विरोध का खतरा दिख रहा है, वहां जानबूझकर ग्रामीणों को परेशान किया जा रहा है।


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