Header Ads Widget

खबरों एवं विज्ञापन के लिए संपर्क करे - हेमंत मेहरा...8319962512

जवासा चौराहा पर मारपीट की घटना को लेकर चक्काजाम माध्यम से जनपद क्षेत्र के सदस्य प्रतिनिधि दिग्विजय सिंह आमलीखेड़ा बताया कि भादवामाता चौराहा मनासा-नीमच रोड का सबसे व्यस्ततम चौराहा है। भौगोलिक दृष्टि से भी चौराहा नीमच, जावद और मनासा तीनों विधानसभाओं को जोड़ता है। चौराहे पर तीनों विधानसभाओं के निवासियों के कई व्यापारी संस्था है। परंतु पिछले कुछ दिनों में देखने में आया कि जवासा चौराहे पर दिन प्रतिदिन अपराधिक घटनाएं बढ़ती जा रही है। हाल ही में कुछ दिनों पहले फायरिंग की घटना की सूचना आई थी और अब हफ्ता वसूली की भाजपा की सरकार में ग्रामीण इलाकों में भी अब अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं और वह बेख़ौफ़ घूम रहे हैं। आमजन की लड़ाई में राजनीति से ऊपर उठकर हम सबको मिलकर जनता के हितों की रक्षा हेतु मिलकर प्रयास करने चाहिए भारत जोड़ो यात्रा का हिस्सा होने के कारण मैंने बुराहनपुर से उक्त घटना के संदर्भ में मैंने एसपी और थाना प्रभारी से बात की एवं मामले की जांच कर उचित कार्रवाई हेतु निवेदन किया।


इंदौर- उच्च न्यायालय इंदौर मे दायर एक जनहित याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय ने शासन को यह आदेश दिया कि वह मंदसौर गोलीकांड की जांच के लिए गठित जैन आयोग की रिपोर्ट अभी तक पटल पर क्यों नहीं रखी गई , इस बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करें याचिकाकर्ता पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने याचिका मे माननीय उच्च न्यायालय से प्रार्थना की कि शासन को मंदसौर गोलीकांड की रिपोर्ट विधानसभा मे पेश करने हेतू आदेश करे किसान आंदोलन के दौरान दिनांक 06.06.2017 को मंदसौर मे हुये गोलीकांड , जिसमे 5 किसानो की मृत्यु हुई थी , की जाँच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश , न्यायमूर्ति जे.के. जैन की अध्यक्षता में “जैन आयोग” का गठन किया था , आयोग द्वारा अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को 13 जून 2018 में प्रस्तुत कर दी गई थी , जाँच आयोग अधिनियम , 1952 की धारा 3(4) के अनुसार , शासन का यह दायित्व है कि वह जाँच आयोग की रिपोर्ट तथा रिपोर्ट की अनुशंसा अनुसार की गई कार्यवाही 6 माह के भीतर विधानसभा में प्रस्तुत करे , परन्तु आज दिनांक तक शासन द्वारा न ही रिपोर्ट पर कोई कार्यवाही की गई और न ही अधिनियम के अनुसार रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत की गई , सचिवालय  विधानसभा द्वारा बार-बार इस हेतु पत्र भी सामान्य प्रशासन विभाग को लिखा गया था याचिका में आज  21.11.2022 को शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया  कि कमीशन ऑफ इन्क्वायरी कानून की धारा 3(4) के अंतर्गत विधानसभा के पटल पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना बंधनकारी नहीं है और इस हेतु न्यायालय द्वारा कोई भी आदेश नहीं दिया जा सकता , न्यायमूर्ति विवेक रूसिया तथा न्यायमूर्ति अमरनाथ केसरवानी की युगल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को रिजॉइंडर् प्रस्तुत करने हेतु 2 सप्ताह का समय दिया है , याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी अधिवक्ता प्रत्यूष मिश्र द्वारा की गई है

Post a Comment

0 Comments