चीताखेडा-15सितंबर। राजस्थान से लगा नीमच जिले के गांव चीता खेड़ा में गो वंश में लंपी स्किन वायरस रोग सक्रिय हो गया है। लंपी स्किन रोग के संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए, जिला कलेक्टर चीता खेड़ा के पशु चिकित्सालय मुख्यालय पर 11 वाइल वैक्सीन डोज लगाने का लक्ष्य दिया है। चीताखेड़ा, अमावली जागीर, पीठ, नायनखेडी गांव के गो वंश में लंपी स्किन वायरस के रोग की पुष्टि हुई है ए.वी.एफ.ओ. डॉ.केसरीमल मोंगिया पशु चिकित्सालय विभाग ने बताया कि गांव में अनुमानित 2हजार 200 पशुओं की संख्या है। जिनमें 500गो वंश है और 1हजार 700 अन्य पशु है। चीता खेड़ा में 2 गायों में लंपी स्किन वायरस की पुष्टि हुई है। वैसे अभी तक तो इस बीमारी से किसी गो वंश की मौत नहीं हुई है। विभाग ने दावा किया कि राजस्थान से लगे चीता खेड़ा गांव में 11वाइल भेजी गई है ।1वाइल में 60गौ वंशिओ को वैक्सीनेशन किया जा सकता है। 660 गौ वंश को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य दिया गया है, जिनमें से चीताखेड़ा पशु चिकित्सालय में गुरुवार को 250 गौ वंशिओ को वैक्सीनेशन किया गया है। वैसे वर्तमान में चीताखेडा में कुल 500 गो वंश में से 2 गोवंश में लंपी स्किन वायरस रोग की पुष्टि की गई है। कारुलाल माली और सौभाग्य मल माली की गाय में लंपी स्किन वायरस रोग के लक्षण दिखाई देने की पुष्टि हुई है पशुओं में लगातार बढ़ रहा है वायरस का खतरा चीताखेड़ा क्षेत्र में लंपी स्किन वायरस रोग के बढ़ते केस को देखते हुए गुरुवार को पशु चिकित्सालय में गौ पालकों ने अपनी गो वंश को चिकित्सालय ले जाकर वैक्सीनेशन करवाया गया। गो वंश में प्रतिदिन अब धीरे-धीरे लंपी स्किन वायरस रोग बढ़ने लगे हैं गोवंश में लंपी स्किन वायरस के लक्षण गो वंशिओं में लंपी स्किन वायरस रोग के लक्षण पांव में सुजन,नाक से पानी टपकना,घास नहीं खाना,शरीर पर गठानें, बुखार आना जैसे लक्षण दिखते हैं तो उन पशुओं में लंपी स्किन वायरस रोग होता है। ए.वी.एफ.ओ. डॉ.केसरीमल मोंगिया, डॉ.विजय शर्मा भ्रत्य, विनोद धानोक गो सेवक द्वारा चीताखेड़ा पशु चिकित्सालय परिसर में गुरुवार को 250 गो वंशिओं को वैक्सीनेशन किया गया ए .बी. एफ.ओ. डॉ.केसरीमल मोंगिया ने बताया कि जिन गायों में लंपी स्किन वायरस रोग जो सस्पेक्ट होती है उनके ब्लड के सैंपल भोपाल लेबोरेट्री जांच के लिए भेजते हैं। भोपाल से जिनकी लगभग सप्ताह भर में रिपोर्ट आती है। डॉ.श्री मोंगिया ने गो वंश पालकों से अनुरोध किया है कि जिन गायों में ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत संबंधित विभाग में सूचना दें और और जीन पशु में लक्षण दिखाई देते हैं तो उन पशुओं से अन्य पशु दूर रखें।


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