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शासन समय रहते देता ध्यान तो जनता एवं कालोनाईजर नहीं होते परेशान सरकार ने अवैध कालोनियों को वैध करने का निर्णय लिया तो आलोट में प्रक्रिया क्यों चालू नहीं की गई

एक कालोनाईजर जब खेती की भूमि खरीदता है ओर उसका डायवर्शन करता है फिर वह कालोनी काटने का लायसेंस बनाता है उसके बाद उस जमीन पर नक्शा बनाकर छोटे छोटे प्लाट काटता है उसे नगर परिषद ,विद्युत मंडल, वन विभाग,नजूल विभाग,आदि से  अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है इतनी प्रक्रिया से गुजरने एवं इन विभागों के चक्कर काटने के बाद उसे ग्राम एवं नगर निवेश विभाग में नक्शे को पास कराने एवं कालोनी की  स्वीकृति प्राप्त करने की इतनी बड़ी पेचीदगी से उसे गुजरना पड़ता है या तो वह इन सब प्रक्रियाओं को पूरा कर लेता है ओर सर्वसुविघायुक्त कालोनी काट कर इन सब प्रक्रियाओं पर हुवे खर्च को जनता से वसूलता है जिससे कालोनी के प्लाट के रेट बढ़ जाते हैं वहीं दूसरी ओर ऐसे कालोनाईजर जो इन प्रक्रियाओं को पूरा ना कर पाते है और इन विभागों के चक्कर काट कर परेशान हो जाते हैं वह बिना डेवलपमेंट की कालोनियां काटने का रास्ता अपनाते है जिसे कानूनी भाषा में अवैध कालोनी कहा जाता है  चुकी वह कालोनी का विकास नहीं करता है इसलिए वह अपनी लागत से कुछ मुनाफा निकालते हुवे  प्लाट को सस्ते भाव में बेच देता है ओर लोग भी कम कीमत होने के कारण प्लाट खरीद लेते है क्योंकि वे डेवलोपमेंट  कॉलोनी में महंगे भाव के प्लाट नहीं खरीद सकते अतः वे ऐसी सस्ती कालोनियों का रुख करते है जहां मुर्रहम की रोड बनाकर प्लाट काट कर कालोनाईजर द्वारा अपनी लागत पर कुछ मुनाफा हासिल कर जल्दी जल्दी प्लाट बेच दिए जाते है ताकि जो लागत लगी वो वसूल  हो जावे तथा जिससे जमीन खरीदी उसका भुगतान हो सके यही नहीं नगर परिषद एवं तहसील कार्यालय के कई चक्कर काटने  के बाद उसका डायवर्शन एवं नामांतरण हो पाता है इस प्रक्रिया में कई समय बित जाता है इतने समय में जिन लोगो ने प्लाट लिए है उनकी कीमत भी बढ़ जाती है कालोनाईजर कालोनी के सारे प्लाट बेच कर फ्री होना चाहता है लेकिन एक बार इस प्रक्रिया में फसने के बाद वो कालोनी उसका पीछा नहीं छोड़ती उस पर अवैध कालोनी का तमगा लग जाता है जिस कारण उसे नेता, अधिकारी,पत्रकार आदि के कोप भाजन का शिकार होना पड़ता है ओर जिस व्यक्ति ने कालोनी में प्लाट लिया है वह भी सुविधाओं के नाम पर उसे आखे दिखता है जबकि प्लाट लेते समय वो ये सब बात नहीं देखता और शासन भी जब कालोनी कट रही थी उस समय उसके नामांतरण एवं रजिस्ट्री पर रोक नहीं लगाता अगर शुरू से ही रोक लग जाती तो गरीब एवं कालोनाईजर दोनों इस अव्यवस्था के शिकार होने से बच जाते जहां ऐसी अवैध कॉलोनियों को वैध करने की सरकार द्वारा भी योजना चलाई जाती है लेकिन प्रशासन द्वारा इसे गंभीरता से न लेते हुवे  इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता जिससे रहवासी परेशान होते रहते हैं शासन द्वारा ऐसे कालोनाईजर के खिलाफ एफ,अाई,आर,भी दर्ज कर दी जावेगी रोड भी उखाड़ दी जावेगी उसका लायसेंस भी समाप्त कर दिया जावेगा लेकिन इसके बाद उस कालोनी में रहने वाले रहवासियों को कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा उसकी चिंता किसी को नहीं है सरकार में  को चाहिए कि ऐसी अवैध कालोनियों को वैध  करने के लिए प्रक्रिया का पालन करें कुछ पैसा जनभागीदारी से कुछ पैसा कालोनाईजर से ओर कुछ सरकार से मिलाकर ऐसे अवैध कॉलोनियों को वैध करने का प्रयास करना चाहिए और जो नई कालोनियां अवैध रूप से बन रही है अनपर प्रारंभ से ही रोक लगानी चाहिए जिससे आम जन इनके चक्रव्यू में न फस सके

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