सीतामऊ। विधानसभा चुनाव में वीआईपी सीटों पर अच्छी टक्कर देखने को मिल सकती है। कांग्रेस पूरी रणनीति के साथ भाजपा के मंत्रियों के सामने प्रत्याशी खड़े कर रही है। सुवासरा में हरदीप सिंह डंग के सामने फिर से राकेश पाटीदार को उतारा है जो लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं वही सुवासरा विस में पाटीदार समाज सबसे बड़ा वोट बैंक भी है। इधर भाजपा में कार्यकर्त्ताओ की नाराजगी और भीतरघात जैसी स्थिति की भी आशंका है, ऐसे में सरदार उन्हें हल्के में लेने की गलती इस बार नहीं कर सकते 29 हजारी' कहकर राकेश का मजाक बनाने वालों के लिए भी ये सदमे कम नहीं कि दर्जन भर दावेदारों के बाद भी राकेश ने अकेले जिद और जुनून के दम पर दिखाया वो किया जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। कम से कम 29 हज़ार से हारने के बाद टिकट वापसी की तो कतई नहीं। इसका सबसे बड़ा कारण रहा पार्टी में पहली बार चुनाव और टिकट वितरण में बड़े नेताओं का कोटा सिस्टम नहीं चला। उम्मीदवार वो ही बना, जिसकी जीत की उम्मीद उजली और जिसका नाम सर्वे में अव्वल था। इधर चुनावी मौसम में राकेश पाटीदार उनके समर्थक आत्मविश्वास से लबरेज नजर आ रहे हैं। ये कॉन्फिडेंस पार्टी की सूची जारी करने के बाद और ऊंचाई पर पहुंच गया है नतीजतन इस बार सुवासरा विधानसभा में जनता का मिजाज भी बदला बदला सा नजर आ रहा है, तो कांग्रेस भी जीत के विश्वास से भरी हुई देखी जा रही हैं। राकेश के लबरेज आत्मविश्वास का यही कारण है। कल मंगलवार को पार्टी ने घोषणा पत्र भी जारी कर दिया है। कहा जा रहा था कि टिकट के ऐलान के बाद कांग्रेस में भी फूट पड़ सकता है परंतु ऐसा कुछ दिखाई नही दिया, सत्ता आने की मंशा में नेता खुलकर बगावती तेवर दिखाने का साहस नहीं जुटा पाए। वहीं जो नाराज है उन्हें मनाने में कांग्रेस भी जुट चुकी है। वही रूठे नेता भी जानते हे, अगर सरकार आई तो कहीं न कही उनका भी भला ही है। ऐसे में अब यह देखना रोचक होगा की सहानुभूति से भरी जनता के बीच राकेश पाटीदार किस प्रकार से पहुंचते है


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