निम्बाहेडा/ वैसे तो भ्रष्टाचार तो हर जगह हावी है,लेकिन निम्बाहेड़ा कृषि उपज मंडी ने तो भ्रष्टाचार की सारी हदें ही पार कर दी। आपसी मिलीभगत से सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने के लिए हर संभव तरीका अपना रखा है और अपने मकसद में कामयाब भी हो रहे हैं और सरकार को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचा चुके हैं कृषि उपज मंडी में दो नम्बरी कारोबार जोरों पर है । मंडी में आनेवाली लगभग 50 से 60 प्रतिशत कृषि उपज बिना टैक्स चुकाए सेटिंग से बाहर जा रही है। मंडी में निलामी के लिए आने वाली जिंसो के कई ढेर की निलामी रजिस्टर में इंट्री ही नही की जाती है वहीं तुलाई के बाद तुलारा पर्ची नहीं, काटी जाकर पर्ची पर ही वजन लिखकर दे दिया जाता है। जिसका हिसाब उपर का उपर कर व्यापारी द्वारा मंडी टैक्स बचा लिया जाता है। तुलारो को इस काम के लिए रुपये दो रुपये बोरी अलग से भुगतान किया जाता है। सत्ताधारी गल के नेताओं का वरद हस्त प्राप्त व्यापारी मंडी प्रशासन पर दबाव बना कर जमकर टैक्स चोरी करने में लगे हुए हैं। मंहगी कृषि जिंस का हिसाब किताब उपर का उपर निपटा दिया जाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक ही नम्बर की दो दो विक्रय पर्ची बुक भी इसमें इस्तेमाल की जा रही है। मूंगफली, गेंहू, मैथी इसबगोल सहित कई कृषि जिंस आवक की लगभग आधी से ज्यादा बिना टैक्स मंडी से बाहर निकाली जा रही है वहीं ऑयल मिल मालिक सीधे ही मिल पर माल तुलवा कर मंडी टैक्स एवं जीएसटी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। टैक्स चोरी के खेल में मंडी अधिकारियो की मिली भगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। पिछले तीन-चार सालों के हिसाब किताब की विस्तृत जांच किए जाने पर लाखों रुपए की टैक्स चोरी सामने आ सकती है। टैक्स चोरों के भय और आतंक के चलते इमानदार व्यापारियों को व्यवसाय करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।


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