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सीपी जोशी ने लगाया मास्टर स्टोक एक तीर से दो निशाने प्रदेश अध्यक्ष बन कर चली बड़ी सियासत चाल

चित्तौड़गढ़  लोकसभा के सासंद सी पी जोशी को भाजपा के आला कमान ने राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बना कर राजस्थान की राजनीति मै मोदी जी ने अपना रुतबा कायम करने की कोशिश की*जिसकी जिम्मेदारी अपने निकटतम सासंद को पहले प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया जिसके तहत वसुंधरा राजे को साइड लाइन करना था उनका मेवाड़ मै बड़ी पकड़ थी उसको कम करने के लिए सी पी जोशी साहब को चुना गया सूत्रों की माने तो उसमे चित्तौड़गढ़  लोकसभा के  विधान सभा पर वसुंधरा राजे का प्रभाव वाली सीट है जिसमे पहली। निंबाहेड़ा प्रतापगढ़  बड़ीसादड़ निंबाहेड़ा से पूर्व udh मंत्री श्री चंद कृपलानी है जो वसुंधरा राजे की करीब है वही प्रतापगढ़ से नंद लाल मीणा  जो की वसुंधरा राजे के सबसे निकट मंत्री रहे है और बड़ी सादड़ी विधायक ललित ओस्तवाल भी वसुंधरा गुट के माने जाते है ऐसे मै 3 जगह का टिकिट बदला जाना तय था  जिसको लेकर संघ सर्वे भी करवाया गया और उम्मीदवार भी दौड़ मै शामिल हुए वही चित्तौड़ गढ़ विधान सभा की सीट को भी बदलने की कयावद सीपी जोशी की  थी क्योंकि सीपीजोशी और चित्तौड़ गढ़ विधान सभा के विधायक चंद्रभान आक्या साहब के पटती नही थी चंद्रभान सिंह लगातार 2 बार जीत कर अपना वजूद बढ़ा रहे थे  जो सीपी जोशी को पसंद नही आया उसके लिए उन्होंने अपने करीबी को टिकिट दिलवाने का खेल शुरू किया  वही निंबाहेड़ा विधान सभा से श्री चंद कृपलानी का वजूद भी सीपी जोशी को पता था वो सांसद और यूडीएच मंत्री सहित विधायक भी रह चुके है जो उनके जिले मै प्रतिस्पर्धा मै थे । इसलिएपार्टी सूत्रों की माने तो निंबाहेड़ा विधान सभा मै काग्रेस उम्मीदवार उदयलाल आंजना का माहौल एक तरफा देख पार्टी आलाकमान ने इसको रोकने के लिए सांसद साहब सी पी जोशी को यहां से उतारने की रणनीति तय की गई थी परंतु सी पी जोशी यहां से नही लड़ कर वल्लभ नगर से चुनाव लडने की बात रखी परंतु पार्टी ने निंबाहेड़ा विधान सभा से ही नाम तय किया था भाजपा की पहली लिस्ट जारी होते ही सासंद को उम्मीदवार और वसुंधरा राजे के गुट को अनदेखा करने के कारण भाजपा मै भारी विरोध होने लगा  और पार्टी ने इस पर भारी मंथन किया गया और पार्टी आलाकमान ने  वसुंधरा राजे गुट को कमजोर सीट पर उम्मीदवार बनाने की रणनीति बनाई गई सीधे जिससे ज्यादा उम्मीदवार नही आए और वसुंधरा को साइड लाइन किया जाए और कार्यकर्ता और वसुंधरा गुट को संतुष्ट  किया जाए इसी माहोल का फायदा उठाते हुए जयपुर से नरपत राजवी का टिकिट कटने से  और नरपत राजवी का विरोध का फायदा सीपी जोशी ने तुरंत चित्तौड़ गढ़ विधान सभा से टिकिट देने की अपील की जिससे आला कमान ने सहमति बन गई जिससे सीपी जोशी इस सीट को जितवाने का भी वादा किया गया  इस तरह सी पी जोशी ने चित्तौड़ गढ़ विधायक चंद्र भान सिंह आक्या का टिकिट कटवाया गया वही निंबाहेड़ा सर्वे मै भी भाजपा की सबसे कमजोर सीट मानी जा रही थी इस सीट को जितना भाजपा के समीकरण से नही माना जा रहा था जिसका आभास सीपी जोशी को भी हुआ उन्होंने अपना पासा पलटते हुए पूर्व यूडीएच मंत्री श्री चंद कृपलानी के नाम पर सहमति रखी जिससे वसुंधरा गुट खुश भी हो और अपने वजूद भी बना रहे  वही प्रतापगढ़ की बात करे तो प्रताप गढ़ मै गुटबाजी और रामलाल मीणा के बढ़ते वजूद के आगे भाजपा के पास कोई जिताऊ उम्मीदवार नही होने से नंदलाल मीणा के लड़के हेमंत मीणा को उम्मीदवार घोषित किया गया वही बड़ी सादड़ी विधान सभा से विधायक ललित ओस्तवाल का जमीनी स्तर पर विरोध और बदलाव और स्थानीय मुद्दे को देखते हुए सीपी जोशी ने संघ समर्थक गोतम दक  को टिकिट दे दिया गया इस तरह राजनीति विश्लेषण की माने तो सीपी जोशी साहब ने राजनीति मै एक तीर से दो शिकार कर लिए है चित्तौड़ गढ़ विधायक चंद्रभानसिंह  आक्या यही गाइड लाइन पार करते है तो सीपी जोशी के लिए बहुत आसान होगा जैसा लग रहा है की चंद्रभान के टिकिट कटने से माहोल एक तरफा हो जायेगा ऐसा नहीं है नरपत रावजी जो यहां से दो बार चुनाव लड़ चुके है उनका भी दबदबा है और फिर सीपी जोशी का पूरा समर्थन साथ रहेगा ऐसे मै ये मुकाबला भी एक तरफा  नही होगा मगर चंद्रभान सिंह अगर दो दिन मै कोई राजनीति का सियासी चाल चल जाते है तो निश्चित*रूप से सीपी जोशी उसमे 100 प्रतिशत फेल हो जायेगे राजनीति मै निर्दलीय चुनाव लड़ कर सिर्फ  सामने वाले को सिर्फ हराया जा सकता है समाप्त नही किया जा सकता है अगर जितना है तो चंद्र भान सिंह को बहुत बड़ा फैसला लेना होना और  अगर उन्होंने ये फैसला किया तो शायद इनके राजनीतिक जीवन का बहुत बड़ा फैसला होगा जो राजनीति को आगे ले जाने मै कही नही चूकेगा अब देखन है की चंद्रभान सिंह आक्या क्या करते है और सीपी जोशी इसे कैसे सफल बनाते है मेवाड़ की राजनीति पर कई सीट पर इसका प्रभाव पड़ेगा सूत्र रिपोर्ट

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