सिंगोली:-300 की आबादी वाले टोकरा गांव के लोगों की दास्तां हैरान करने वाली है। गांव के लोगों को मात्र डेढ़ सौ फीट दूर अपने खेत पर जाने के लिए भी करीब 20 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है। पेच यह कि इस दौरान उन्हें दो बसें बदलनी होती है जिनका कोई टाइम टेबल नहीं हैl ऐसे में लोग भले ही अपने खेत पर पहुंच जाए लेकिन खेती बाड़ी का काम तो दूर मोटी रकम खर्च होने के बाद भी पूरा दिन खेत पर आने जाने में ही निकल जाता हैl मजे की बात यह है कि गांव के अधिकांश लोग स्थानीय विधायक मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा के कट्टर समर्थक माने जाते है परंतु विकास के मामले में उनके हाथ खाली ही रहे। मंत्री की इस उपेक्षा ने ग्रामीणों को झकझोर डाला। ग्रामीणों की मानें तो मंत्री सखलेचा का अब गांव में घुसना भी दुश्वार होगा साल में 10 महीने बहता है पानी यह गांव सेना तलाई ग्राम पंचायत में आता है। गांव से पंचायत मुख्यालय पर जाने के लिए ग्रामीणों को ब्राह्मणी नदी से होकर गुजरना पड़ता है जो 12 में से 10 महीने बहती है। पानी काफी गहरा रहता है। इस कारण ग्रामीण करीब डेढ़ सौ मीटर चौड़ी नदी को पार करने से कतराते हैं क्योंकि पहले भी यहां हादसे हो चुके हैं। ग्रामीणों के सामने संकट यह है कि नदी के उस पार भी उनकी जमीनें है। इसके अलावा ग्राम पंचायत मुख्यालय पहुंचने का भी यह सबसे शॉर्टकट रास्ता है। इस रास्ते से पंचायत मुख्यालय करीब साढ़े तीन किलोमीटर दूर पड़ता है तहसील मुख्यालय होकर पहुंचते हैं पंचायत और खेत पर ग्रामीण प्रकाश सिंह के अनुसार नदी पार कर पंचायत मुख्यालय पहुंचने का सबसे शॉर्ट रास्ता है। मुसीबत यह है कि नदी में पानी चलता रहता है ऐसे में ग्रामीणों को नदी के उसे पर अपने खेतों पर जाने के लिए भी करीब 20 किलोमीटर का चक्कर काट सिंगोली, कुंवर जी का खेड़ा और मोटियारड़ा गांव होकर जाना होता है। क्योंकि गांव में परिवहन का कोई साधन नहीं है । ऐसे में बसों को बदल बदल कर गंतव्य तक पहुंचते हैं तब तक शाम पड़ जाती है। इस कारण किसान अपने खेतों पर भी कोई काम नहीं कर पाते और सिर्फ देखरेख कर लौट आते है पाइप का पुलिया हो सकता है विकल्प रणवीर सिंह के अनुसार सीमेंट पाइप का पुलिया निकाल कर नदी वाले रास्ते का विकल्प उपलब्ध कराया जा सकता है। 10 से 15 लाख रुपए में यह काम हो सकता है। हम मंत्री सखलेचा के कट्टर समर्थक है और गांव के 90 फीसदी लोग वर्षों से उनके साथ है बात नहीं सुनते और बैठने को कहते हैं, हम उनके गुलाम नहीं इसके बावजूद सखलेचा द्वारा हमारे गांव के लिए कोई भी काम नहीं कराया गया जबकि हम नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। कई बार बोला गया परंतु आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। पिछले कुछ समय से बैठकों के दौरान मंत्री की खिलाफत की जाने लगी तो पार्टी की दुहाई देकर बैठने को कहा जाता है लेकिन विधायक जी को एक बात समझ लेना चाहिए कि हम कोई बंधे हुए नहीं है और इस बार समस्त युवाओं के साथ गांव के लोगों ने सबक सिखाने की ठान ली।


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