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आवरी माता जी से मांगी गई मुराद पूरी होने पर ,मां से किए वादे के अनुसार चीताखेडा से मां के दरबार तक लगाईं लौट


चीताखेडा-3अक्टूंबर।धर्म और आस्था का कोई अंत नहीं हैं,आध्यशक्ति वायुमंडल के कण-कण मे व्याप्त हैं। मां शक्ति है, समृद्धि है, स्थितरता है, असंख्य गुणों का केंद्र हैं।यह नौ दिन ममता और उर्जा की आराधना का पर्व हैं, शारदीय नवरात्र के 9 दिन आराधना आस्था और भक्ति के साथ ही साधना के दिन हैं। मां के भक्त इन दिनों  मां की भक्ति मे लिन  हैं, और इसी के साथ कोई निराहार तो कोई वास,उपवास तो कोई नगे पैरों रहकर मां तो कोई लौट (लौटन) यात्रा पूरी कर के रिझाने के प्रयास में लगे हुए हैं शारदेय नवरात्र का धार्मिक,आध्यात्मिक,लोकिक और शारिरिक दृष्टि से बडा महत्व हैं।ऐसा ही एक प्रत्यक्ष उदाहरण है , चीताखेडा से लगा माताकाखेडा की पावन धरा पर  अतिप्राचीन  विख्यात आध्यशक्ति धाम आरोग्य देवी आवरीमाता जी का अलोकिक दरबार जहां हजारों भक्त मां के दरबार में अपनी अर्जित लगाते हैं।कहते यहां मां आवरीमाता अपने भक्तों के हर दु:ख को समेट लेती हैं। मां के दरबार मे सच्चे मन से श्रृद्धा लेकर आने वाले भक्तों की मनोवांछित कामनाएं पुरी होती हैं। ऐसी ही चीताखेडा के ही सुनिल (भूरा) बंजारा ने  आरोग्य देवी महामाया आवरी माता जी से  मांगी गई मनोवांछित मुरादें पूरी होने पर चीताखेडा के शनिदेव मंदिर से सोमवार को प्रातः 4बजे लौटन (लौटते हुए) यात्रा प्रारंभ कि ढ़ाई किलोमीटर दूरी तय करते हुए आवरी माता जी के अलौकिक दरबार तक  प्रात:11पहूचें।लौटन यात्रा के दौरान सुनिल बंजारा के भाई कमलेश बंजारा, शंकर लाल बंजारा और उनके परिवार के सभी सदस्य  मां आवरी माता जी का जयकारा लगाते हुए साथ चल रहे थे।लौटन यात्रा पूरी होने पर लौट लगाने वाले सुनिल बंजारा और उनके परिवार जनों का मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने मां के दुपट्टे ओढ़ा कर आत्मीय स्वागत किया।

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