चीताखेडा-5अक्टूंबरंबर। विजयादशमी सिर्फ इस बात का प्रतीक नहीं है कि अन्याय पर न्याय अथवा बुराई पर अच्छाई की विजय हुई थी बल्कि यह बुराई में भी अच्छाई ढूंढने का दिन होता है। दशहरा पर्व भारतीय संस्कृति में सबसे ज्यादा बेसब्री के साथ इंतजार किए जाने वाला त्यौहार हैं। दशहरे के पूर्व नौ दिनों तक शारदेय नवरात्र काल में दशों दिशाओं में देवी मां की शक्ति के संचारित होता है। दशमी तिथि पर दिशाएं देवी मां के नियंत्रण में आ जाती है, इसी कारण इसे दशहरा कहते हैं रावण को न केवल शास्त्रों बल्कि 64 कलाओं में महारत हासिल थी। जिनके बुधवार की शाम 7:30बजे दशहरे मैदान में ग्राम पंचायत के तत्वावधान में 21फिट ऊंचे पुतले का पटाखों की भव्य आतिशबाजी के साथ हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में हुआ दहन। दशहरे के दिन इस त्यौहार को मनाने से रावण के अंदर अंहकार के मार्ग बुराई के मार्ग पर चलने से ज्ञानी होने के बावजूद भी अंत तह भगवान श्रीराम के हाथों मरना पड़ा। इसी कारण वश बुराई पर अच्छाई का संदेश देता है। दशहरे पर्व के अवसर पर चारभुजा नाथ मंदिर से विशेष विमान में भगवान श्रीराम का मुखोटा विराजमान करके ढोल ढमाकों एवं डीजे पर श्रीराम के धार्मिक गीतों की धुनों पर सैकड़ों श्रद्धालु जय श्री राम के जयघोष के साथ प्रमुख मार्गों से परिभ्रमण करते हुए भव्य शोभायात्रा के रूप में दशहरे मैदान पहुंचे।दशानन लंका पति लंकेश के पुतले के दहन से पूर्व पटाखों की रंग-बिरंगी आतिशबाजी की गई, जिनका हजारों दर्शकों ने निहारा। शास्त्रों एवं 64कलाओं में महारथ हासिल लंका पति रावण के 21फिट ऊंचे पुतले का दहन किया गया।


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